Thursday, 12 March 2015

होली की यादें

अब होली में पहले जैसा मज़ा कहाँ होली का मज़ा तो बचपन में था जब घर के बाहर से गुजरने वाले होली के रंगों में डूबे ट्रक में सवार लोगो को देखते और शोर मचाते थे उस दिन मोहल्ले का हर आदमी क्रिकेट फील्ड में दिखाई देता था चाहे वो क्रिकेट खेलता हो या नहीं और शाम में पतंग उड़ाने का अपना अलग ही मज़ा था लेकिन अफ़सोस नफरत की राजनीति करने वाले ने अब तो त्यौहार भी हिन्दू मुस्लिम के रंगों में बाँट दिए है

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